कम्प्यूटर टेक्नालॉजी की चौथी सबसे बड़ी कम्पनी सत्यम को जिंदा करने का जोरशोर से प्रयास शुरू हो गया है। इसके नतीजे भी सामने आने लगे हैं और सबसे ज्यादा राहत कम्पनी के उन ५३ हजार कर्मचारियों को मिल रही है जो नौकरी जाने की चिंता में डूबे हुये थे। इस मामले में कई आश्चर्यजनक और उम्मीदों से भरे तथ्य भी सामने आ रहे हैं। इनमें एक यह है कि 'सत्यम' के नाम को उल्टा करके रामलिंगा राजू के बेटों ने जो 'मेटास' नाम से दो कपंनियां बनायी थीं उनमें भी कई कर्मचारी 'सत्यम' से ही मूलरूप से जुड़े हैं। कहा तो यह जाता है कि लगभग २० हजार कर्मचारियों का हेरफेर है और यही बात सरकार के लिए सबसे ज्यादा उत्साहजनक है क्योंकि कर्मचारियों का भार इतना कम हो जाने पर कम्पनी की देनदारियां अपने आप कम हो जाएंगी।
दूसरी बात यह है कि सरकार ने अपनी तरफ से जो निदेशक मण्डल तैयार किया है वह कंपनी को डूबने से बचाने का ठोस प्रयास करने लगा है। पहला कदम यह उठाया जा रहा है कि सत्यम को अपनी बैकिंग कम्पनियों में पूंजी जुटाने के लिए कहा गया है। सत्यम की निजी बैंकिंग कम्पनियों में सिटी ग्रुप और बी एनपी पारिवार हैं। यह बैंकिंग संस्थाएं सत्यम कम्प्यूटर सर्विसेज के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाने का काम कर रही हैं। इसके साथ ही कई अदायगी के लिए थोड़ा और समय देने का अनुरोध किया गया है। देश के अंदर 'सत्यम' के कारोबारियों का भरोसा बढ़ते ही विदेशों में भी लोगों को उम्मीद जगी है कि उनका काम और दाम डूबने नहीं पायेगा। उधर मेटास के माध्यम से भी सत्यम को आर्थिक मदद मिलेगी। इस प्रकार सत्यम कम्प्यूटर्स सर्विसेज का जो जहाज एकदम डूबता नजर आ रहा था वह समुद्र की सतह तक पहुंचने से पहले ही ऊपर आना शुरू हो गया है। इसे हमारे देश के आर्थिक विशेषज्ञों और केन्द्र सरकार की दूरदर्शिता ही कहा जाएगा। साथ ही आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार इस मुद्दे को चुनावी दृष्टिकोण से भी देख रही है। (हिफी)