अहमदाबाद। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निश्चित रूप से अपना राजनीतिक कद और बड़ा कर दिया है। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री पद के द्घोषित उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी को ही इस पद के सर्वथा योग्य करार देते हुए साफ-साफ कहा कि वे प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नहीं शामिल हैं। इतना ही नहीं उन्होंने उन उद्योगपतियों को भी नसीहत दी जो राजनीति में दखलंदाजी करने का प्रयास कर रहे थे।
श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में अपनी व्यक्तिगत छबि बनाने के साथ ही भाजपा की साख भी बढ़ाई है। गुजरात के दंगों का आरोप अब राजनीति से प्रेरित ज्यादा लगने लगा है। विपक्षी दल भी अब उन पर आरोप लगाने से डर रहे हैं क्योंकि वहां की जनता ने ही उन अरोपों को ठुकरा दिया है। अभी ताजा विवाद भाजपा में प्रधानमंत्री पद को लेकर उभरा और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता भैरों सिंह शेखावत तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने श्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के लिए ज्यादा उपयुक्त बताया। इसी के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से अहमदाबाद में कहा कि मैं प्रधानमंत्री की कुर्सी की दौड़ में शामिल नहीं हूँ। इतना ही नहीं उन्होंने अम्बानी ग्रुप के श्री अनिल अम्बानी और भारती ग्रुप के चेयरमैन सुनील मित्तल को भी चेताया कि प्रधानमंत्री की
कुर्सी उद्योगपति नहीं तय करेंगे। ध्यान रहे की अनिल अम्बानी और सुनील मित्तल ने श्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त
नेता कहा था। यह एक तरह से श्री आडवाणी की उपेक्षा थी जिस पर श्री नरेन्द्र मोदी का जवाब देना जरूरी भी था।
बहरहाल अपनी एक आक्रामक और रचनात्मक छवि के साथ भापाई परचम ऊंचा रखने के चलते
मोदी का कद बढ़ा है बशर्ते कोई सियासी ग्रहण न
लगे। (हिफी)