भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा काफी सफलता मिली लेकिन वह सरकार बनाने में सफल नहीं हो सकी। कांग्रेस
अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को मध्य प्रदेश से ज्यादा उम्मीद थी क्योंकि वहां सत्तारूढ़ भाजपा के अन्दर अर्से से खींचतान चल रही थी। सबसे पहले सुश्री उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं। बाद में बाबूलाल गौर को यह कुर्सी दी गयी और इसके बाद शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाया गया। इस बीच सुश्री उमा भारती की द्घर वापसी की कवायद भी चलती रही। इसके बावजूद वर्ष २००८ के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की २३० सीटों में १४२ पर सफलता प्राप्त कर ली। कांग्रेस को सिर्फ ७० सीटों पर संतोष करना पड़ा।
ऐसा क्यों हुआ, इसी की समीक्षा करने के लिए नयी दिल्ली में गत दिनों कांग्रेसियों की बैठक हुई। इस बैठक में मध्य प्रदेश से कांग्रेस के प्रमुख नेता मौजूद थे। उस बैठक में भी लगभग वही राय थी जो श्रीमती जमुना देवी ने बाद में व्यक्त की। श्रीमती जमुना देवी ने कहा कि राज्य में पार्टी के नेताओं में एकता का अभाव और भाजपा सरकार की कमजोरियों को हम जनता के बीच पहुंचाने में नाकाम रहे। उन्होंने कहा राज्य में कांग्रेस को दूसरी बार पराजय का सामना इसीलिए करना पड़ा। श्रीमती जमुना देवी ने कहा कि राज्य में कांग्रेस सरकार के पांच वषोर्ं का कार्यकाल भाजपा शासन से कहीं अधिक अच्छा था। उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोगों को इस बार टिकट हीं नहीं दिये गये जो निश्चित रूप से जीत सकते थे और दूसरी ओर राज्य के कई बड़े नेता सिर्फ उन उम्मीदवारों को जिताने के लिए ही प्रयास करते रहे जिसका उन्होंने टिकट दिलवाया था। इस प्रकार पार्टी में एकता का पूरी तरह के अभाव दिखाई दिया था।
जमुना देवी ने कहा कि नेताओं का यह संद्घर्ष अभी भी थमा नहीं है। उन्होंने राज्य विधायक दल के नेता के चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी बार इस पद के लिए चुनी गयीं जबकि वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह अपने बेटे अजय सिंह को यह पद दिलाना चाहते थे। श्रीमती जमुना देवी की बात आगामी संसद चुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। (हिफी)